Friday, May 11, 2012

सिर्फ़ बूढ़े हुए कि पीर हुए


रोजे महशर किताब पूछेगी

संजय चतुर्वेदी


इन्कलाबी कई वज़ीर हुए
सब उसी जुल्फ़ के असीर हुए

दिन की ताबिश में सर्वहारा थे
रात आई तो जहाँगीर हुए

रोजे महशर क़िताब पूछेगी
सिर्फ़ बूढ़े हुए कि पीर हुए 

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